कालसर्प दोष:
कालसर्प दोष पर दीपक के पाराशर का लेख
कालसर्प योग,मंगल दोष,पितृ दोष पर लेख लिखने के बाद इनबाक्स में या कॉल पर बहुत से लोगों के अनुभव प्राप्त हुए।।

ठगी का जो मुख्य अस्त्र है वह काल सर्प दोष ही है जिससे जातक को भयाक्रांत करके उसकी कष्ट कमाई का दोहन किया जाता है।।इसके पूरे पूरे गिरोह भी बने हुए हैं।।
पूजा पाठ के लिए पंडितजी लोगों की दस दस टीम रखकर काल सर्प दोष का निवारण करने वाले गिरोह का भी पता लगा।।
खैर मैं किसी का नाम लेकर लोकप्रियता प्राप्त करने वाले खेल नहीं करता हूं।। मेरा उत्तरदायित्व ज्योतिष शास्त्र के प्रति है।।
अतः ये ज्योतिष के सेमिनार,गिरोह आदि मैं नहीं जानता।।
अब ज्योतिष की मर्यादा तो खंडित होगी ही और लोगों का अविश्वास भी बढ़ेगा ही बढ़ेगा क्योंकि जो योग धरातल पर है ही नहीं किसी वृहत शास्त्र में इसकी कोई चर्चा नहीं फिर भी उसके नाम पर जब दोहन किया जाएगा तो काहे की मर्यादा की उम्मीद शेष होगी।।
खैर विषय को परिवर्तित कर रहा हूं
अनंत, कुलिक,वासुकी,शंखपाल,पद्म, महापद्म,तक्षक,कर्कोटक,शंखचूड़, घातक,विषधर,शेषनाग ये बारह प्रकार के कालसर्प योग बताए जाते हैं।।
प्रथम भाव में राहु और सप्तम में केतु तो अलग नाम,द्वितीय में राहु तो अलग,तीसरे में अलग इस तरह से ये पूरे बारह सर्पों का वर्णन है।।
अब इसमें नया खेल जुड़ता है।।आंशिक काल सर्प दोष भी बताया जाता है।।
अब कोई पूर्ण में नहीं फंसा तो आंशिक में ही बात बना ली जाए कुछ कम दे जाए पर दे जाए।।
अब राहु और केतु के मध्य सारे ग्रह होने को काल सर्प कहा जाता है किंतु किसी जन्म पत्री में शुक्र इनके मध्य से बाहर है तो उसे शुक्र तक्षक,शुक्र पद्म इत्यादि बारह नाम दे दिए जाते हैं।।
चंद्र से बारह शनि से बारह इस तरह से लगभग 150 सर्प बना दिए गए हैं।।
नाम भी ससुरे ऐसे हैं कि जो ज्योतिष को न मानता हो वह भी भयभीत हो जाए कि पता नहीं क्या बला है।।
एक ज्योतिषी तो ऐसे भी हैं जो टीवी चैनल पर आते हैं और हर एक को काल सर्प की पूजा बताते हैं।।
पूजा का पैकेज 50 हजार से प्रारंभ हो जाता है आगे संख्या बढ़ते बढ़ते एवरेस्ट तक भी जा सकती है जैसा ग्राहक होता है वैसी ही संख्या बना दी जाती है।।
टीवी चैनल के पैसे बनते हैं अतः उनके भी मजे हैं।।
इस खेल में फंसते बेचारे आम आदमी है जो पता नहीं किस किस चिंता में व्यथित हैं उस के ऊपर ये सर्प भी आ जाते हैं।।
इन गधों से कोई पूछ ले कि ज्योतिष भयभीत करता है या भय मुक्त करने का शास्त्र है।।
महर्षि भृगु ने जब भृगु संहिता कि रचना की थी तो ब्राह्मणों को भय मुक्त करने के लिए की थी।।
दूसरे के भाग्य और कर्म के आकलन का दावा करते हैं और अपने स्वयं के बिगाड़ लेते हैं।।
खैर ऐसे किसी दोष का वर्णन न वेदों में है न भृगु संहिता में है न ही पितामह पाराशर ने वृहत पाराशर होरा शास्त्र में इसका वर्णन किया है।।
ये लोग महर्षि भृगु और पाराशर से ज्यादा तो नहीं जानते होंगे???
अतः ऐसे किसी योग से भयभीत होकर अपने धन की हत्या न करें।।
निश्चिंत और निर्द्वंद रहें काल सर्प जिनकी कुंडली में नहीं होता है वो सब भी यहां अनंत काल तक नहीं रहते हैं।।
कुछ लोग इन योग पर लिखने के बाद इनबॉक्स में मुझे भी भय दिखाने आए थे उनके लिए दो पंक्ति लिख दे रहा हूं।।
सदा सभी नेताओं का विरोध करता आया हूं।।जिस के बारे में सोचकर लोगों को भय लगता है उस डीप स्टेट और illuminati पर सबसे पहले लिखने वालों में से एक मैं स्वयं हूं।।
अतः जब उन्हीं का विरोध काम न आया तो ये विरोध तो खेल भी नहीं है।।

