मोहक मीडिया । 178 फुट लम्बा और 156 फुट चौड़ा बेलूर का चेन्नाकेशव मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला का बेहतरीन नमूना है।
1117 ई. में नरेश विष्णुवर्धन द्वारा बनवाए गए इस मंदिर की मूर्तियाँ परिधान रहित हैं। इसकी नक़्क़ाशी और बनावट गुरुत्वाकर्षण रेखा की चौंका देने वाली रचना में है। अद्भुत एवं अकल्पनीय..

104 साल और 3 पीढ़ियां लगीं इस मंदिर के निर्माण में.. हज़ारों साल से अखंडित खड़े ये देवालय दुनिया की सबसे प्राचीन और महान सभ्यता के जीवित प्रतीक हैं,
सिंगल चट्टान काट कर एकड़ों के हिसाब से अद्भुत मन्दिर बना देने वाले पूर्वजों पर गर्व करें, सोशल मीडिया नहीं आता तो आधा भारत तो तेजोमहालय को ही सर्वश्रेष्ठ कृति मानता रह जाता जबकि असल में आज रैंकिंग की जाए तो तेजोमहालय भारत के टॉप 50 में भी नहीं आएगा..

चेन्नाकेशव मंदिर, बेलूर
मन्दिर के भीतर की शीर्षाधार मूर्तियों में देवी सरस्वती का उत्कृष्ट मूर्तिचित्र देखते ही बनता है। देवी नृत्यमुद्रा में हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री के लिए सर्वथा नई बात है। इस मूर्ति की विशिष्ट कला इसकी गुरुत्वाकर्षण रेखा की अनोखी रचना में है।

यदि मूर्ति के सिर पर पानी डाला जाए तो वह नासिका से नीचे होकर वाम पार्श्व से होता हुआ खुली वाम हथेली में आकर गिरता है और वहाँ से दाहिने पाँव में नृत्य मुद्रा में स्थित तलवे (जो गुरुत्वाकर्षण रेखा का आधार है) में होता हुआ बाएँ पाँव पर गिर जाता है।
वास्तव में होयसल वास्तु विशारदों ने इन कलाकृतियों के निर्माण में मूर्तिकारी की कला को चरमावस्था पर पहुँचा कर उन्हें संसार की सर्वश्रेष्ठ शिल्पकृतियों में उच्च स्थान का अधिकारी बना दिया है
1433 ई. में ईरान के यात्री अब्दुल रज़ाक ने इस मन्दिर के बारे में लिखा था कि वह इसके शिल्प के वर्णन करते हुए डरता था कि कहीं उसके प्रशंसात्मक कथन को लोग अतिशयोक्ति न मान लें !
