माता पार्वती और भगवान शिव के पावन पुनर्मिलन का प्रतीक तीज, तीज महोत्सव की झलकियाँ

मोहक मीडिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 जन्म लिए, लेकिन कठोर तपस्या के बाद 108वें जन्म में सावन के महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को शिवजी ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह पर्व इसी पावन पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है।

तीज 2026पूजा की विधि

  1. मिट्टी के शिव-पार्वती: इस दिन रेत या शुद्ध मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं अपने हाथों से बनाई जाती हैं।
  2. सुहाग सामग्री: माता पार्वती को सोलह शृंगार (मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, महावर) अर्पित किया जाता है।
  3. अभिषेक: शिवजी को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और गंगाजल अर्पित कर आरती की जाती है।

तीज के लोक-रंग: मेंहदी, झूले और घेवर का स्वाद

तीज का सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष इतना जीवंत है कि यह हर नीरस ज़िंदगी में रंग भर देता है।

  • हरे रंग का शृंगार: हरियाली तीज पर स्त्रियां हरे रंग की लहरिया साड़ी, हरी चूड़ियां पहनती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि वे प्रकृति के इस उत्सव का हिस्सा हैं।
  • हाथों में रची मेंहदी: तीज के एक दिन पहले ‘सिंधारा’ मनाया जाता है। हथेलियों पर रचने वाली मेंहदी की गहरी लाली को पति के गहरे प्रेम से जोड़कर देखा जाता है।
  • पेड़ों पर झूले: गाँवों से लेकर शहरों के पार्कों तक, पेड़ों की डालियों पर सावन के झूले पड़ते हैं। सखियों का साथ मिलकर मल्हार और लोकगीत गाना मानो हवाओं में मिठास घोल देता है।
  • घेवर की मिठास: राजस्थान और उत्तर भारत में तीज बिना घेवर के अधूरी है। मलाई और चाशनी में डूबा यह पारंपरिक मिष्ठान इस त्योहार का स्वाद बढ़ा देता है।
  •  सावन की रिमझिम फुहारें के बीच भारतीय संस्कृति की सबसे खूबसूरत तस्वीर है—तीज। यह नारीत्व के उत्सव, प्रकृति के शृंगार और भगवान शिव-माता पार्वती के अलौकिक प्रेम का प्रतीक है।

तीज महोत्सव की झलकियाँ

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