
अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का “सदी का महानायक” कहा जाता है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अनगिनत सुपरहिट फिल्में दीं और करोड़ों दिलों पर राज किया। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फिल्मों में अपनी जगह बनाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था।
उनका यह संघर्ष साल 1973 में खत्म हुआ, जब एक फिल्म ने उनकी किस्मत बदल दी। यह फिल्म थी ‘जंजीर’, जिसने अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड का नया सुपरस्टार बना दिया।
‘सात हिंदुस्तानी’ से शुरू हुआ सफर
अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत ‘सात हिन्दुस्तानी’ से की थी। हालांकि शुरुआत आसान नहीं रही। कई फिल्मों से उन्हें बाहर कर दिया गया और लंबे समय तक उन्हें संघर्ष करना पड़ा। उनकी लंबी कद-काठी और भारी आवाज उस दौर के पारंपरिक हीरो से अलग मानी जाती थी। यही वजह थी कि शुरुआती दिनों में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। लेकिन अमिताभ ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।
1973 में बदली किस्मत।
फिर आया साल 1973, जब निर्देशक ‘प्रकाश मेहरा’ की फिल्म ‘जंजीर’ रिलीज हुई।
फिल्म की कहानी मशहूर लेखक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर ने लिखी थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने इंस्पेक्टर विजय का किरदार निभाया। गुस्से से भरा, अन्याय के खिलाफ लड़ने वाला यह किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि अमिताभ रातोंरात स्टार बन गए।यहीं से उन्हें “एंग्री यंग मैन” की पहचान मिली। 350 दिनों तक थिएटर में चली थी फिल्म ‘जंजीर’ सिर्फ हिट नहीं हुई, बल्कि उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फिल्म मुंबई के इम्पीरियल थिएटर में करीब 50 हफ्तों यानी लगभग 350 दिनों तक लगातार चली थी। इसके अलावा देश के कई सिनेमाघरों में फिल्म ने 100 दिनों से ज्यादा का रन पूरा किया था। उस समय यह किसी रिकॉर्ड से कम नहीं माना जाता था। फिल्म की सफलता ने अमिताभ बच्चन को इंडस्ट्री में मजबूत पहचान दिला दी।
जया बच्चन और प्राण ने भी जीता दिल
‘जंजीर’ में जया बच्चन और प्राण भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। खासकर प्राण का “शेर खान” वाला किरदार आज भी याद किया जाता है। अमिताभ और प्राण की दोस्ती फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बनी थी। फिल्म के संवाद और एक्शन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
‘शोले’ तक पहुंचाया जंजीर ने
‘जंजीर’ की सफलता ने अमिताभ बच्चन के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए।इसी फिल्म की कामयाबी के बाद उन्हें निर्देशक रमेश सिप्पी की कल्ट क्लासिक “शोले” मिली।दिलचस्प बात यह है कि “शोले” की कहानी भी ‘सलीम खान’ और ‘जावेद अख्तर’ की जोड़ी ने लिखी थी। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए।
आज भी यादगार है “जंजीर” को अमिताभ बच्चन के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है।यह सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म नहीं थी, बल्कि वही फिल्म थी जिसने हिंदी सिनेमा को उसका “महानायक” दिया।

