ना आह होंठो तलक ही आई, न अश्क हमको बहाना आया
उन्हें मोहोब्बत न रास आई, हमें न उनको भुलाना आया
न राज़ ए दिल ही छुपा सके हम, न हाल ए दिल ही सुनाना आया
कभी न आयेंगे जानते थे, मगर उन्हें हम न रोक पाए
ना आह होंठो तलक ही आई, न अश्क हमको बहाना आया
हैं भूल बैठे उन्हें मगर हम ये कैसे कह दें वफ़ा नहीं है
समझ गए हम जो अश्क आये कि याद गुज़रा ज़माना आया
न पा सके हम न खो सके हम, कसक सी दिल में रही हमेशा
जो याद आई किसी की चाहत न अश्क हमको छुपाना आया
कभी किसी के न हो सकोगे, हमारी आदत सी हो गई है
न छोड़ने का ही हौसला है न साथ तुमको निभाना आया
अजब मोहोब्बत है ‘सिंह’ उनकी, वफ़ा भी की तो जफा समझकर
न तोड़ पाए हमारी कसमें, न वादों को ही निभाना आया
समीक्षा ‘सिंह’ | भारत
