चतुर्जात आयुर्वेद का एक प्रसिद्ध सुगंधित औषधि-समूह है, जिसका उपयोग पाचन शक्ति बढ़ाने, हृदय को बल देने और शरीर में स्फूर्ति लाने के लिए किया जाता है।
यह चार श्रेष्ठ मसालों का दिव्य मिश्रण माना जाता है।
चतुर्जात में कौन-कौन सी औषधियाँ होती हैं?
1. दालचीनी (Tvak)
2. छोटी इलायची (Ela)
3. तेजपत्ता (Patra)
4. नागकेसर (Nagkesar)
इन चारों के मेल से “चतुर्जात” बनता है।
चतुर्जात के मुख्य गुण
सुगंधित
दीपनीय (भूख बढ़ाने वाला)
पाचन सुधारक
कफ नाशक
हृदय को बल देने वाला
शरीर में ताजगी लाने वाला
चतुर्जात के लाभ (Benefits)
1. पाचन शक्ति बढ़ाए ![]()
यह मंदाग्नि, अजीर्ण, गैस और पेट भारीपन में लाभकारी माना जाता है।
2. भूख बढ़ाने में सहायक
जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए उपयोगी।
3. कफ और बलगम कम करे
सर्दी, खांसी और बलगम में राहत देने में सहायक।
4. हृदय को शक्ति दे
इसकी सुगंध और गुण हृदय को स्फूर्ति देने वाले माने जाते हैं।
5. मुंह की दुर्गंध दूर करे
मुख को सुगंधित और ताज़ा बनाए रखने में उपयोगी।
6. शरीर में ताजगी और ऊर्जा लाए
थकान और सुस्ती कम करने में सहायक।
किन रोगों में उपयोग किया जाता है?
अजीर्ण
गैस
भूख न लगना
सर्दी-जुकाम
खांसी
बलगम
मुख दुर्गंध
कमजोरी
हृदय दुर्बलता
चतुर्जात बनाने की विधि
आवश्यक सामग्री
दालचीनी — 25 ग्राम
छोटी इलायची — 25 ग्राम
तेजपत्ता — 25 ग्राम
नागकेसर — 25 ग्राम
बनाने की प्रक्रिया
1. सभी औषधियों को धूप में हल्का सुखा लें।
2. फिर इन्हें अलग-अलग बारीक पीस लें।
3. अब सभी चूर्ण को अच्छी तरह मिलाएं।
4. कांच की साफ बोतल में भरकर रखें।
आपका चतुर्जात चूर्ण तैयार है।
सेवन विधि
1 से 3 ग्राम चूर्ण
शहद या गुनगुने पानी के साथ
दिन में 1–2 बार भोजन के बाद
सावधानियाँ
अधिक मात्रा में सेवन न करें।
गर्भवती महिलाएँ वैद्य की सलाह से लें।
तेज पित्त वाले लोग सीमित मात्रा में उपयोग करें।
आयुर्वेदिक विशेषता
चतुर्जात केवल मसालों का मिश्रण नहीं, बल्कि — “अग्नि (Digestive Fire) को प्रज्वलित करने वाला सुगंधित योग” माना जाता है।
यह शरीर को हल्कापन, ताजगी और पाचन शक्ति देने में विशेष माना जाता है।

