मां धारी देवी चारों धाम की रक्षक देवी हैं और पूरे देवभूमि उत्तराखंड की रक्षा करती हैं। कहा जाता है कि सदियों पहले मां की दिव्य मूर्ति अलकनंदा नदी में बहकर आई थी। एक रात गांव वालों को सपना आया कि इस मूर्ति को नदी के बीच स्थापित करो, तभी से यहां मंदिर बना।
भक्तों का विश्वास है कि मां धारी देवी दिन में तीन रूप बदलती हैं — सुबह कन्या, दोपहर युवती और रात में वृद्धा का स्वरूप धारण करती हैं। यह भी कहा जाता है कि जब-जब मां की मूर्ति को अपने स्थान से हटाने का प्रयास हुआ, तब उत्तराखंड में बड़ी आपदाएँ आईं। मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। आज भी लाखों श्रद्धालु यहां दिव्य दर्शन के लिए पहुंचते हैं

