मोहक मीडिया। लद्दाख को हर मौसम में कश्मीर और शेष भारत से जोड़ने वाली जोजिला सुरंग का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। हिमालय की दुर्गम और बर्फीली पहाड़ियों को भेदकर भारत ने इस परियोजना में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
सर्दियों में जब भारी बर्फबारी और हिमस्खलन होते हैं, तो जोजिला दर्रा साल में करीब 6–7 महीने बंद रहता है, जिससे लद्दाख का सड़क संपर्क कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है और उस समय केवल हवाई यात्रा ही एकमात्र विकल्प बचती है।
अब यह सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच पूरे 365 दिन सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करेगी। रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से भी इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लद्दाख चीन और पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ संवेदनशील क्षेत्र है। अब किसी भी मौसम में भारतीय सेना को सीमा क्षेत्रों तक पूरे वर्ष निर्बाध पहुंच मिल सकेगी।
जोजिला टनल प्रोजेक्ट ने मंगलवार को खुदाई का ऐतिहासिक आखिरी पड़ाव (ब्रेकथ्रू) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ मिलकर करगिल की तरफ से आखिरी औपचारिक बेकथ्रू हुआ।
इस सुरंग के जरिए बालटाल (सोनमर्ग) और मीनामर्ग (द्रास-करगिल) की तरफ से हो रही खुदाई के हिस्से आपस में जुड़ गए।
ईरान से आए यूसुफ जोजिला टनल के लिए अथॉरिटी इंजीनियर हैं। इसे एक शानदार टनल बताते हुए, यूसुफ ने से कहा कि उन्हें इस अहम प्रोजेक्ट से जुड़ने पर गर्व है। यूसुफ 10 साल से ज्यादा कर रहे काम इस बड़ी कामयाबी से उत्साहित होकर यूसुफ ने जोजिला को अपने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर का सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट बताया।

