त्रिपुरा के छोटे से गांव की रहने वाली अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किग्रा जूडो वर्ग में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। पिता के निधन के सात महीने बाद उनकी बेटी ने भारत को जूडो में पहला CWG स्वर्ण पदक दिलाकर उनके सपने को साकार किया।
कॉमनवेल्थ खेलों में महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व मंच पर देश का मान बढ़ाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार की सदस्य उप निरीक्षक सुश्री अस्मिता डे को हार्दिक बधाई।
कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय जूडो खिलाड़ी बनकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुशासन, उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा की उज्ज्वल प्रतीक यह स्वर्णिम उपलब्धि हर पुलिसकर्मी के लिए प्रेरणा, हर बेटी के लिए विश्वास और प्रत्येक भारतवासी के लिए गर्व का विषय है।
हर खिलाड़ी अपने साथ वर्षों की मेहनत, अनगिनत त्याग और देश के लिए कुछ कर दिखाने का सपना लेकर मैदान में उतरा। किसी ने इतिहास रचा, किसी ने नया रिकॉर्ड बनाया और किसी ने आख़िरी दम तक लड़कर तिरंगे का मान ऊंचा रखा।
नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, अस्मिता डे, दिलीप महाडू गावित, गुलवीर सिंह, ज्ञानेश्वरी यादव जैसे खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने पूरे देश को गर्व से भर दिया। इनके साथ हर उस खिलाड़ी ने, जिसने भारत का प्रतिनिधित्व किया, इस अभियान को यादगार बना दिया।
13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य—कुल 39 मेडल सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हर उस खिलाड़ी के संघर्ष, समर्पण और जज़्बे की कहानी हैं जिसने भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया।
