प्यार एक अंगीठी है”। (अरुण जैमिनी)
पति ने पत्नी को
पास बुलाया
प्यार करते हुए उसे
प्यार का अर्थ समझाया –
“यूँ तो प्यार एक आग है-
शोला है
चिंगारी है
धुँआ है
फिर भी प्यार की तड़प
कितनी मीठी है”
पत्नी बोली-
“सीधी तरह क्यों नहीं कहते
प्यार एक अंगीठी है”।
(अरुण जैमिनी)
