चितकुल। भारत का सबसे खूबसूरत गाँव।
हिमाचल प्रदेश की ऊँची पहाड़ियों और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बसा चितकुल ऐसा गाँव है, जहाँ पहुँचते ही लगता है जैसे किसी पोस्टकार्ड वाली दुनिया में आ गए हों। भारत तिब्बत सीमा के पास स्थित यह छोटा सा गाँव अपनी शांति, लकड़ी के पुराने घरों, बहती बास्पा नदी और चारों तरफ फैली हिमालय की खूबसूरती के लिए जाना जाता है।

गाँव में मौजूद “हिंदुस्तान का आख़िरी ढाबा” यहाँ आने वाले हर यात्री के लिए खास आकर्षण है। बर्फीले पहाड़ों और नदी के शानदार दृश्य के बीच बैठकर गरम हिमाचली खाना खाने का अनुभव लंबे समय तक याद रहता है। बास्पा नदी के किनारे कैंपिंग करना, ठंडी हवा में हाइकिंग करना और रात को अलाव के पास बैठकर तारों से भरे आसमान को देखना यहाँ की सबसे खूबसूरत यादों में शामिल हो जाता है।
गाँव के बीच स्थित माता चितकुल मंदिर अपनी लकड़ी की तिब्बती शैली की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। वहीं पास में मौजूद कामरू किला पूरी सांगला वैली का शानदार दृश्य दिखाता है। चितकुल का हर रास्ता, हर घर और हर मोड़ इतना सुंदर लगता है कि यहाँ फोटोग्राफी करते हुए समय का पता ही नहीं चलता।

अगर आप दिल्ली से चितकुल जा रहे हैं तो रास्ता कुछ इस तरह रहेगा। दिल्ली से चंडीगढ़ करीब 250 किमी, चंडीगढ़ से शिमला 115 किमी, शिमला से नारकंडा 65 किमी, नारकंडा से रामपुर बुशहर करीब 100 किमी, फिर रामपुर से सांगला करीब 95 किमी और सांगला से चितकुल करीब 25 किमी दूर है। कुल मिलाकर दिल्ली से चितकुल की दूरी करीब 600 किमी और चंडीगढ़ से करीब 350 किमी पड़ती है। रास्ता जितना लंबा है, उतना ही खूबसूरत भी है।
बस से यात्रा करने वालों के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ से शिमला तक HRTC या वोल्वो बस आसानी से मिल जाती है। इसके बाद शिमला से रिकांग पिओ के लिए लोकल बस ले सकते हैं। रिकांग पिओ से चितकुल के लिए सीमित HRTC बसें चलती हैं, नहीं तो टैक्सी आसानी से मिल जाती है। ट्रेन से आने वालों के लिए सबसे नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ है, जहाँ से आगे सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है।
चितकुल घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्टूबर तक माना जाता है। नवंबर से मार्च के बीच यहाँ भारी बर्फबारी होती है, जिसके कारण कई रास्ते और कैंपिंग पॉइंट बंद हो जाते हैं।
करीब 11,320 फीट की ऊँचाई पर बसे इस गाँव में ट्रेकिंग, नदी किनारे कैंपिंग, लोकल गाँव की सैर, सूर्योदय और सूर्यास्त देखना, मंदिर दर्शन और फोटोग्राफी जैसी कई चीजें की जा सकती हैं। सच कहें तो चितकुल सिर्फ एक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जिसे देखकर कई लोग सच में कश्मीर तक भूल जाते हैं।

