गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
मोहक मीडिया ।महर्षि वेदव्यास जी की जयंती तथा भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के पावन पर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) की समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और आत्मबोध का सर्वोच्च स्रोत माना गया है। महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों के संकलन एवं महाभारत की रचना के माध्यम से मानवता को अमूल्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर प्रदान की।
आइए, इस पावन अवसर पर अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा उनके आदर्शों और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर रहने का संकल्प लें।

गुरुः प्लवो हि संसारे जन्मकोटिशतार्णवे।
अज्ञानतिमिरान्धानां नेत्रोन्मीलनकारकः॥
सैकड़ों करोड़ जन्मों के संसार समुद्र में गुरु ही नौका हैं। अज्ञान-तिमिर (अज्ञान के अंधकार ) से अन्धे हुए जीवों के नेत्र खोलने वाले हैं।
