मोहक मीडिया। देहरादून में मेट्रो नियो, हरिद्वार-ऋषिकेश में मेट्रो और दिल्ली-NCR से जुड़ने वाला नमो भारत कॉरिडोर—एक साथ बढ़ रही कनेक्टिविटी की योजनाएं
उत्तराखंड में भविष्य के शहरी और क्षेत्रीय परिवहन को लेकर कई बड़ी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें देहरादून मेट्रो नियो, हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो नियो और मेरठ से हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश तक नमो भारत RRTS विस्तार प्रमुख हैं। हालांकि, इनमें से कई परियोजनाएं अभी DPR, सर्वे या स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।
UKMRC की DPR में देहरादून शहर के लिए करीब 22.4 किमी नेटवर्क और 25 स्टेशनों वाला मेट्रो नियो प्रस्तावित किया गया है। इसमें शहर के भीतर अलग-अलग प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। मेट्रो नियो रबर-टायर आधारित प्रणाली के रूप में प्रस्तावित है।
UKMRC की DPR में हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो नियो कॉरिडोर भी शामिल है। आधिकारिक DPR में इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 34.15 किमी और 20 स्टेशनों का प्रस्ताव दर्ज है।
यानी भविष्य में हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय आवाजाही के लिए एक अलग तेज सार्वजनिक परिवहन विकल्प विकसित करने की योजना है।
दूसरी बड़ी योजना मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश नमो भारत RRTS कॉरिडोर है। जून 2026 में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और NCRTC के बीच इस विस्तार को लेकर सहमति बनी। प्रस्तावित करीब 150 किमी का नया कॉरिडोर मोदीपुरम से लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश तक जाने वाला है। इसके लिए DPR तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
प्रस्तावित मार्ग में मेरठ क्षेत्र, मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे। उत्तराखंड में यह लाइन रुड़की से प्रवेश कर हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश तक पहुंचने का प्रस्ताव है।
मौजूदा दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की लंबाई करीब 82 किमी है और यह फरवरी 2026 से पूरी तरह परिचालन में है। प्रस्तावित 150 किमी विस्तार के बाद दिल्ली से ऋषिकेश तक करीब 230 किमी का पूरा सफर लगभग 3 घंटे में होने का अनुमान अधिकारियों के बयानों में दिया गया है।
फरवरी 2026 में मेरठ में नमो भारत और मेरठ मेट्रो को एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलाने वाला मॉडल शुरू हुआ। इससे क्षेत्रीय और शहर के भीतर की यात्रा को एक नेटवर्क से जोड़ने का उदाहरण सामने आया है।
उत्तराखंड में भी भविष्य की योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग परिवहन साधनों को आपस में जोड़ना है, ताकि दिल्ली-NCR से आने वाले यात्री हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून की ओर आगे आसानी से जा सकें।
उत्तराखंड की परिवहन योजनाओं में रोपवे भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिद्वार में मनसा देवी-चंडी देवी से जुड़े रोपवे प्रस्ताव भी धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
अगर ये प्रस्ताव अलग-अलग चरणों में जमीन पर उतरते हैं, तो उत्तराखंड में शहर के भीतर मेट्रो नियो, लंबी दूरी के लिए नमो भारत और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रोपवे जैसे परिवहन विकल्प एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश को जोड़ने वाली इन योजनाओं के साथ उत्तराखंड की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का भविष्य किस दिशा में जाएगा, यह इनके DPR, मंजूरी और आगे के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
