प्रकृति की अनमोल,अद्भुत और रहस्यमय देन
नारियल का फल पेड़ की सबसे ऊँची शाखा पर होता है।
न कोई पाइप, न कोई छेद…
फिर भी उसके अंदर इतना मीठा और साफ पानी होता है।
नारियल का पानी बाहर से नहीं डाला जाता। यह पेड़ की जड़ों द्वारा मिट्टी से खींचे गए पानी और घुले हुए खनिजों से बनता है।
जड़ें मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं।
यह पानी तने के अंदर मौजूद जाइलम (Xylem) नामक नलिकाओं से ऊपर फल तक पहुँचता है।
जब नारियल छोटा होता है, तब उसके अंदर का पूरा भाग एक पारदर्शी, मीठे तरल से भरा होता है। यही नारियल पानी है।
जैसे-जैसे नारियल पकता है
अंदर मौजूद पानी का एक हिस्सा धीरे-धीरे सफेद गूदे (Kernel) में बदलने लगता है।
इसलिए कच्चे नारियल में पानी अधिक और पके नारियल में पानी कम लेकिन गूदा अधिक होता है।
नारियल के पानी में प्राकृतिक रूप से बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं। जैसे
पोटैशियम
मैग्नीशियम
कैल्शियम
सोडियम
फॉस्फोरस
प्राकृतिक शर्करा
इलेक्ट्रोलाइट्स
इसी कारण यह गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
अगर नारियल पूरी तरह बंद और बिना क्षति के है, तो उसके अंदर का पानी सामान्यतः बहुत स्वच्छ होता है, लेकिन एक बार नारियल खुलने के बाद उसमें जीवाणु बढ़ सकते हैं, इसलिए उसे जल्द पी लेना चाहिए।

एक कच्चे नारियल में लगभग 200–500 ml तक पानी हो सकता है। यह मात्रा नारियल की किस्म, उम्र और बढ़ने की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
पुराने समय में कई लोग मानते थे कि समुद्र का पानी किसी रहस्यमयी तरीके से नारियल के अंदर पहुँच जाता है, क्योंकि नारियल अक्सर समुद्र तटों पर उगते हैं।
जबकि सत्य यह है कि नारियल का पानी किसी ने भरा नहीं होता।
यह पेड़ की जड़ों, तने और फल के अंदर होने वाली प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया का अद्भुत परिणाम है।
विज्ञान के अनुसार जड़ें समुद्री खारे पानी को सीधे नहीं पीतीं।
वे मिट्टी से फ़िल्टर हुआ अपेक्षाकृत कम लवण वाला पानी लेती हैं।
पेड़ अपनी जैविक प्रक्रियाओं से उसे शुद्ध करते हुए फल तक पहुँचाता है।
इसलिए नारियल का पानी मीठा होता है, खारा नहीं।
प्रकृति का यह “नेचुरल ड्रिंक पैक” स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम पेय है।
